Thursday, 20 September 2018

उपदेश

देश में बढ़ते हुए भ्र्ष्टाचार पर आज उसका मन बड़ा दुखी था | कक्षा में पढ़ते हुए उसने कुछ समय तक बच्चों के सामने भ्र्ष्टाचार से होने वाले दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला | बच्चो को भ्रष्टाचार व रिश्वत के खिलाफ लड़ने की प्रतिज्ञा भी दिला ही दी उसने |
अगले दिन जब वह लेक्चर ख़त्म कर के जाने ही वाला था की उसे एक आवश्यक बात याद आई.
उसने बोलना शुरू किया," बच्चो तुम्हारे रसायन विज्ञान की प्रयोगीक परीक्षा की तारीख तय हो गई है, जो परीक्षक महोदय परीक्षा लेने आएंगे उन्हें कुछ उपहार देना होगा ताकि वो खुश हो कर जाएँ, तो कल सभी बच्चे अपने साथ 500 - 500 रुपये लेकर आएंगे और प्रयोगशाला में जमा कराएँगे | "

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